1.(ख)प्रश्न:-आपने 'आजादी'कविता पढ़ी। इस कविता के आधार पर व्यक्त कीजिए कि आपके लिए आजादी क्या है और उसके लिए आप क्या प्रयास कर रहे हैं?
3.(क) प्रश्न:-आपने 'बूढ़ी पृथ्वी का दुख'पाठ पढ़ा। पृथ्वी का दुख दूर करने में आप क्या योगदान देंगे?
उत्तर:-कविता में 'आजादी' का अर्थ यह नहीं बताया है। कि बेकार काम के लिए इधर-उधर घूमने को आजादी कहते हैं। या अगर कोई बच्चा उछल कूद मचा रहा है तो इसका मतलब वह आजादी नहीं है आजादी का अर्थ कर्म से जोड़ दिया गया है। अतः जो व्यक्ति कर्म करता है वही आजादी भोगने का अधिकार रख सकता है।
आजादी का मतलब उदिता मौका परस्ती थोड़ी देर का सुख नहीं है बल्कि इसका संबंध मेहनत और त्याग और बलिदान से है। उसके पीछे अनगिनत लोगों का बलिदान है उन्होंने हमें नई जिंदगी दी है आता काम करने वाला व्यक्ति हैं आजादी का सच्चा अधिकारी है।
2.(क) प्रश्न:-'अंधेरी नगरी' पाठ का मूल उद्देश्य क्या है? आपने इस पाठ से क्या शिक्षा ग्रहण की?
उत्तर:-'अंधेरी नगरी' का उद्देश्य व्यंग्य के माध्यम से अन्यायी शासन-व्यवस्था की विसंगतियों-कमियों को हमारे सामने उजागर करना है। इस नाटक में राजा अन्याय शासन-व्यवस्था का प्रतीक है। इसलिए उसे चौपटट राजा और उसकी नगरी को अंधेरी नगरी कहां गया है। इस चौपट राजा के शासन में सब कुछ टके सेर है यानी भूमि और गोंद का एक ही मोल है अर्थात उनके साथ एक जैसा व्यवहार किया जाता है। भारतेंदु का उद्देश्य केवल इतना नहीं है कि वे किसी अन्यायी राजा की कल्पना करके उस पर चोट करें। भारतेंदु के समय में भारत अंग्रेजों का गुलाम था। अंग्रेजी शासन की आलोचना सीधे-सीधे नहीं की जा सकती थी।
3.(क) प्रश्न:-आपने 'बूढ़ी पृथ्वी का दुख'पाठ पढ़ा। पृथ्वी का दुख दूर करने में आप क्या योगदान देंगे?
उत्तर:-कभी मनुष्य के इस व्यवहार की आलोचना करता है जो अपने सुख को बढ़ाने के लिए प्रकृति से खिलवाड़ करने को चुन लिया है। वह अपने सुख सुविधाओं के लिए पेड़ों को काटा जा रहा है और अपने लिए आकाश से बात करने वाली इमारते बना रहा है। या उसका प्रकृति के प्रति विरोधी व्यवहार है।इसी तरह वह अपने स्वार्थ के लिए नदियों का पानी प्रदूषित कर रहा है और साफ हवा को प्रदूषित कर रहा है सड़क पर लगने वाले वाहनों की कतारें, कारखानों की चिमनिया गंदी हवा छोड़ रही है। जिससे व्यक्तियों को कई तरह के जानलेवा बीमारियां हो रही हैं।
(I)अगर हमारे आस पास कोई पेड़ काटने का प्रयास करेगा तो हम उससे चिपक जाएंगे। पेड़ नहीं काटने देंगे।
(ii) अगर हमारे आस पास कोई पेड़ काटेगा तो इसकी सूचना हम उद्यान विभाग को देंगे ताकि पेड़ काटने वाले दोषियों को तत्काल पकड़ कर उन्हें सजा दिलाए।
(iii) अगर हमारे आसपास को पेड़ पानी खाद की वजह से सूख रहा होगा तो हम फौरन उसे खाद और पानी देंगे ताकि उसका जीवन बचाया जा सके।
4.(क)प्रश्न:-अपने 'उनको प्रणाम' कविता पढ़ी। किसी प्रासंगिक घटना का उदाहरण देकर इस कविता का मूल संदेश व्यक्त करें।
उत्तर:-यहां आप कभी ऐसे लोगों की बात कर रहे है, जो छोटी नौका लेकर समुद्र को पार करने चले थे, लेकिन उनकी मनोकामना पूरी नहीं हो सकी और वह समुद्र में ही समा गए। यहां कभी ऐसे लोगों के साहस और प्रयत्नों का आदर करते हुए उन्हें प्रणाम करता है। यहां कभी कहना चाहते है कि जिन लोगों ने जोश-खरोश के साथ उच्च जीवनादर्शों के लिए संघर्ष किया किंतु सफल नहीं हो सके, उनका भी बड़ा योगदान है, कभी इन पंक्तियों में उन लोगों को प्रणाम करने की इच्छा व्यक्त करता है, जो गए तो थे बर्फीले शिखरों पर चढ़ने के लिए, परंतु बर्फ खिसक जाने या ऐसे हैं किसी विपत्ति के कारण बर्फ के नीचे दब गए। सामान्य लोग किसी की सफलता और असफलता को देखते हैं और सफलता को महत्व देते हैं, लेकिन कवि असफलता के पीछे छिपे प्रयत्नों को भी देखता है। उसके लिए लक्ष्य-प्राप्ति के लिए किए गए प्रयासों का महत्व सफलता से कम नहीं अधिक है। ऐसे लोगों को कवि इसलिए बार-बार प्रणाम करता है।
5.(क)प्रश्न:-पशु पक्षी हमारे जीवन का अभिन्न अंग है और उनके प्रति मानवीय करुणा का भाव रखना चाहिए। पशु पक्षी हमारे मित्र और सहायक हो सकते हैं। यदि हम उनकी रक्षा करेंगे तो वह भी हमारे सुख दुख में साथी होंगे। प्रेम और ममता का भाव पशु-पक्षियों या मान वेतन प्राणियों में भी उसी प्रकार होता है, जैसा कि मानव में। गिल्लू के व्यवहार से लेखिका के मन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा और जिस प्रकार मानव में उम्र के अनुसार शारीरिक एवं व्यवहारगत परिवर्तन होते हैं वैसे ही अधिकांश मान वेतन प्राणियों में भी यह परिवर्तन होते हैं। मनुष्य और पशु के बीच अपना अपने वाले प्रेम की सुंदर अभिव्यक्ति हुई है।इस प्रकार के वर्णन से लेखिका ने पशु के भीतर ऐसी मानवीय संवेदना और ऊंचाई भर दी है जिससे एक छोटा सा जीव महानता का अधिकारी बन जाता है और हमारे दिल को छू जाता है।लेखिका ने गिरोह के जीवन के विविध पक्षों का सुंदर चित्रण करते हुए उसके व्यक्तित्व के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित किया है पशु प्रवृत्ति के संबंध में उनकी निरीक्षण दृष्टि सराहनीय है।गिल्लू जैसे उपेक्षित प्राणी के चित्र को अपने असीम स्नेह से रंग कर लेखिका ने इस प्रकार व्यक्त किया है कि हम उससे एक गहरी आत्मीयता का अनुभव करने लगते हैं।
6.(क) प्रश्न:-स्वास्थ्य और स्वच्छता पर पांच-पांच स्वरचित नारे लिखे और फाइल तैयार करें।
उत्तर:- स्वास्थ्य और स्वच्छता पर पांच-पांच स्वरचित नारे निम्नलिखित हैं।
(I) slogan:-स्वाद और स्वास्थ्य होगा, तभी तो आगे बढ़ेगा इंडिया।
(ii) slogan:-बच्चा-बच्चा करें यही पुकार, स्वच्छ और सुंदर हो देश हमारा।
(iii) slogan:-जान-जान तक या संदेश पहुंचाना है, हमें स्वच्छता को अपनाना है।
(iv) slogan:-धरती पानी हवा रखो साफ, वरना आने वाली पीढ़ी नहीं करेगी माफ।
(v) slogan:-मेरा शहर साफ हो, इसमें हम सबका साथ हो।
हमारे भारतीय संस्कारों में सदियों से एक मान्यता है कि जहां साफ सफाई होती है वहीं पर लक्ष्मी का वास होता है। लेकिन यह बात भी सच है कि साफ-सफाई का हमारे स्वास्थ्य से भी घनिष्ठ नाता है तभी तो जब हम गंदगी के संपर्क में आते हैं तो उसका सीधा कुप्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसलिए अपने और अपने घर की साफ सफाई के साथ-साथ हमें अपने आसपास की सफाई पर भी खास ध्यान देना चाहिए।


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