TMA: (2019 – 2020)
NIOS – CLASS 12 (SENIOR SECONDARY)
SOLVED ASSIGNMENT
MRP: 200
1.(b) भारतीय अर्थव्यवस्था की दो सकारात्मक विशेषताओं की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:-भारतीय अर्थव्यवस्था की दो सकारात्मक विशेषताएं निम्नलिखित हैं:-
(i) पूंजी निर्माण अथवा निवेश की उच्च दर:-स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारतीय अर्थव्यवस्था की एक प्रमुख समस्या भूमि तथा भवन, मशीनों तथा उपकरण, बचत आदि के रूप में पूजी के स्टॉक मैं कमी थी। आर्थिक गतिविधियों जैसे-उत्पादन और उपभोग के चक्र को बनाए रखने के लिए उत्पादन का एक निश्चित अनुपात बचत और निवेश की तरफ जाना चाहिए, लेकिन स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात प्रथम चार से पांच दशकों में यह आवश्यक अनुपात कभी भी उत्पन्न नहीं हुआ।
इसका स्पष्ट कारण उस जनसंख्या के द्वारा, जो अधिकतर गरीब तथा निम्न औसत आय वर्गीय श्रेणी के थे, आवश्यक वस्तुओं के उपभोग का उच्च स्तर रहा। इसके कारण सामूहिक परिवारिक बचत बहुत कम थी। टिकाऊ वस्तुओं का उपयोग भी बहुत कम था। परंतु हाल के वर्षों में कुछ परिवर्तन देखने को मिले हैं।
(ii) नियोजित अर्थव्यवस्था:-भारत एक नियोजित अर्थव्यवस्था है। इसकी विकास की प्रक्रिया 1951-56 की अवधि में प्रथम योजना से पंचवर्षीय योजनाओं के द्वारा निरंतर चल रही है। नियोजन के लाभ सर्वविदित है।नियोजन के द्वारा देश सर्वप्रथम अपनी प्राथमिकताएं काय करता है और उन्हें प्राप्त करने के लिए वित्तीय अनुमान उपलब्ध कराता है। तदनुसार विभिन्न स्रोतों से संसाधनों को न्यूनतम लागत पर लगाने के लिए प्रयत्न किए जाते हैं।भारत ने पहले ही 11 पंचवर्षीय योजना अवधियां पूरी कर ली हैं तथा बारहवीं योजना चल रही है।
2.(b) धारणीय विकास के अर्थ को समझाइए।
उत्तर:-धारणीय विकास के अर्थ:-धारणीय विकास एक ऐसा विकास है, जो भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति की क्षमता से समझौता किए बिना वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। धारणीय विकास में भावी आर्थिक समृद्धि तथा भावी विकास के संरक्षण सम्मिलित होता हैं। अन्य शब्दों में,इसका अभिप्राय प्रत्येक व्यक्ति के लिए जीवन की बेहतर गुणवत्ता से है। धारणीय विकास में भावी आर्थिक संवृद्धि तथा भावी विकास का संरक्षण सम्मिलित होता है। संवृद्धि अनिवार्य है, किंतु धारणीय विकास इसे विभिन्न प्रकार से देखता है।
3.(b) व्यापार और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में सांख्यिकी की आवश्यकता की व्याख्या करें।
उत्तर:-व्यापार और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में सांख्यिकी की आवश्यकता निम्नलिखित है:-
(क) सांख्यिकी की आवश्यकता:-सांख्यिकी की अर्थशास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका है। जीवन के सभी क्षेत्रों में सांख्यिकीय आंकड़ों की आवश्यकता रहती है। वस्तुत: किसी प्रकार का अध्ययन तब तक संपूर्ण नहीं हो पाता, जब तक उसके पुष्टिकारक मारे परिमाणात्मक प्रमाण नहीं मिल जाते। अर्थशास्त्र में अनेक रूपों में सांख्यिकी का प्रयोग होता है। उनमें से कुछ उपयोग इस प्रकार हैं-
(i) आर्थिक सिद्धांतों की रचना में:-हमारे व्यवहारिक जीवन में जो कुछ हम देखते हैं, आर्थिक सिद्धांतों की रचना प्रथमत: उन्हीं के आधार पर होती है। फिरौन अवलोकनो से संबंधित सांख्यिकीय आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर उन सिद्धांतों की पुष्टि या फिर उनका खंडन किया जाता है। उदाहरणतः देखा गया है कि प्राय: ऊंची कीमतों पर उपभोक्ता का मात्रा की मांग करते हैं। जब वास्तविक आंकड़ों से इस बात की पुष्टि होती है कि उपभोक्ता वास्तव में ऊंची कीमतों पर का मांग करते हैं, तभी या इसे एक आर्थिक सिद्धांत का रूप लेता है।
(ii) योजनाओं का निर्माण करने में:-आर्थिक योजनाएं बनाने में सांख्यिकी एक बहुत उपयोगी उपकरण है। सांख्यिकीय जानकारी के आधार पर योजना कार्ड आर्थिक विकास की नीतियों की रचना करते हैं। उदाहरण के लिए, भारत एक अधिक जनसंख्या वाला देश है।किंतु इस अधिकता के अस्तर की सटीक जानकारी तो जनसंख्या और उसके पोषण के लिए उपलब्ध संसाधनों के सांख्यिकीय आंकड़ों से ही मिल पाती है।
Ans:


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